Patient Safety: दुर्घटना हो या हार्ट अटैक, अब मिनटों में मिलेगी मदद; केंद्र सरकार ने जारी की नई NAS 2026 गाइडलाइन
- sakshi choudhary
- 30 Jun, 2026
देश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एंबुलेंस सर्विस (NAS) 2026 ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद एंबुलेंस को औसतन 20 मिनट के भीतर घटनास्थल तक पहुंचना होगा, जबकि कॉल सेंटर को अधिकतम 3 मिनट के भीतर एंबुलेंस डिस्पैच करनी होगी। यदि तय समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी रहेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda ने इन दिशा-निर्देशों को जारी करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पूरे देश में मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण आपात चिकित्सा सेवाएं और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह पहली बार है जब पूरे भारत में एंबुलेंस सेवाओं के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक लागू किए गए हैं।
नई गाइडलाइन के अनुसार अब हर एंबुलेंस में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और प्रशिक्षित चालक की उपलब्धता अनिवार्य होगी। इतना ही नहीं, कॉल सेंटर में भी डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो आपात स्थिति में फोन के माध्यम से EMT को मरीज की हालत के अनुसार तत्काल चिकित्सकीय सलाह देंगे। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सड़क दुर्घटना या अन्य गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उपचार शुरू किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्डन ऑवर के दौरान मिलने वाला सही इलाज हजारों मरीजों की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। सरकार का यह कदम ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निजी एजेंसियों पर भी सख्त मानक लागू किए हैं। अब किसी भी निजी एंबुलेंस को सेवा में शामिल करने से पहले जिला स्तरीय समिति उसकी तकनीकी और चिकित्सा सुविधाओं की जांच करेगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही उसे संचालन की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा कॉल सेंटर को 95 प्रतिशत कॉल केवल 20 सेकेंड के भीतर रिसीव करनी होंगी, जबकि मिस या ड्रॉप हुई 100 प्रतिशत कॉल पर वापस कॉल करना अनिवार्य होगा। नई NAS 2026 गाइडलाइन का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना नहीं, बल्कि रास्ते में ही बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर मृत्यु दर को कम करना और पूरे एंबुलेंस नेटवर्क को अधिक आधुनिक, तेज और जवाबदेह बनाना है।
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