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Greater Noida Authority: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के इन अधिकारीयों पर मंडराया जेल जाने का खतरा! Supreme Court ने दिए सख्त निर्देश, जाने क्या है पूरी मामला

Greater Noida Authority: ग्रेटर नोएडा के एक ऐतिहासिक तावाब की बहाली में हो रही देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक साफ आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा के सैनी गाँव स्थित तालाब पर कोर्ट ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि अगर अगली सुनवाई तक तालाब को पहले जैसा नही किया गया तो ग्रेटर नोएडा के डीएम सहीत ग्रेटर नोएडा प्राधइकरण के कुछ अधिकारी को जेल भेज दिया जाएगा।
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Greater Noida Authority: ग्रेटर नोएडा के एक ऐतिहासिक तालाब की बहाली में हो रही देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक साफ आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा के सैनी गाँव स्थित तालाब पर कोर्ट ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि अगर अगली सुनवाई तक तालाब को पहले जैसा नही किया गया तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारी को जेल भेज दिया जाएगा। Supreme Court द्वारा दिए गए इस सख्त निर्देश के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वकील ने जब अपना पक्ष रखा तो कोर्ट ने कहावती अंदाज़ में जवाब देकर बोलती बंद कर दी। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। 


Greater Noida Authority: 2019 में कोर्ट ने दिए थे निर्देश, नहीं हुआ पालन 

दरअसल ये मामला 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है, जिसमें सैनी गांव के सभी जल स्रोतों को बहाल करने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा में मानसून के बावजूद तालाब पूरी तरह से सूखा पड़ा है और उसमें बारिश का पानी नहीं ठहर रहा। साथ ही बताया कि तालाब का पूरा क्षेत्र पूरी तरह से मिट्टी से भर दिया गया है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की शिकायत करते हुए Supreme Court में कहा कि तालाब की भूमि अब भी निजी पार्टियों के कब्जे में है और राजस्व रिकॉर्ड में जल निकाय के रूप में दर्ज होने के बावजूद इसे भू-माफियाओं से मुक्त नहीं कराया गया।


ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वकील के तर्क का कोर्ट ने दिया ये जवाब 

जब Greater Noida Authority के वकील ने बताया कि शार्प एंटरप्राइजेज को आवंटन रद्द कर दिया गया है, तो कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “किसी की सांस रोककर यह नहीं कह सकते कि वह जिंदा क्यों नहीं है।” Supreme Court ने स्पष्ट किया कि यदि तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया गया तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। यह मामला सिर्फ एक तालाब का नहीं, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारी का बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है।