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Greater Noida: 23 साल पुराने दुष्कर्म मामले में 39 वर्षीय व्यक्ति बरी, अदालत ने जांच में पाई गंभीर खामियां

Greater Noida: दादरी में 23 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 39 वर्षीय आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला जांच में मिली गंभीर खामियों और पारिवारिक रंजिश के आधार पर संदेह का लाभ देते हुए सुनाया। यह मामला वर्ष 2002 का है, जब दादरी थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि उस समय 16 वर्षीय युवक ने एक नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती कर दिया था।
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Greater Noida: दादरी में 23 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 39 वर्षीय आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला जांच में मिली गंभीर खामियों और पारिवारिक रंजिश के आधार पर संदेह का लाभ देते हुए सुनाया। यह मामला वर्ष 2002 का है, जब दादरी थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि उस समय 16 वर्षीय युवक ने एक नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती कर दिया था। पीड़िता के पिता ने 2 जुलाई 2002 को शिकायत दर्ज कराई थी, और मेडिकल जांच में पता चला कि लड़की पांच महीने की गर्भवती थी।


Greater Noida: साल 2012 में हुई थी सपष्ट सुनवाई, अब मिला ये फैसला 

शुरुआत में यह मामला नियमित अदालत में चला, लेकिन 2012 में यह स्पष्ट हुआ कि घटना के समय आरोपी नाबालिग था, जिसके बाद केस जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) में स्थानांतरित कर दिया गया। साल 2021 में JJB ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। आरोपी ने जमानत पर रहते हुए इस फैसले के खिलाफ विशेष पॉक्सो कोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने जांच प्रक्रिया में कई विसंगतियों और पारिवारिक विवाद के कारण झूठे फंसाने के आरोप को अदालत के सामने रखा।


विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सामने लाई ये गलतियां 

विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद पाया कि जांच में गंभीर त्रुटियां थीं और अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए, जिसके बाद उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। इस फैसले ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित किया है।