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ग्रीन बेल्ट में कंक्रीट पाथवे से पर्यावरण को नुकसान, वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

गौतम बुद्ध नगर में ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में कंक्रीट पाथवे बनाने के मामले ने चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरणविद प्रदीप डाहलिया ने आरोप लगाया है कि इस निर्माण से ग्रीन बेल्ट का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है और कई पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुँच रहा है। कुछ पेड़ सूख चुके हैं और क्षेत्र की जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ग्रीन बेल्ट शहर को स्वच्छ हवा देने का प्रमुख साधन है, जिसे कंक्रीट में बदलना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
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गौतम बुद्ध नगर में ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में कंक्रीट पाथवे बनाने के मामले ने चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरणविद प्रदीप डाहलिया ने आरोप लगाया है कि इस निर्माण से ग्रीन बेल्ट का मूल स्वरूप नष्ट हो रहा है और कई पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुँच रहा है। कुछ पेड़ सूख चुके हैं और क्षेत्र की जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ग्रीन बेल्ट शहर को स्वच्छ हवा देने का प्रमुख साधन है, जिसे कंक्रीट में बदलना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।


प्रदीप डाहलिया ने बताया कि इस निर्माण का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा उच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि IGRS पोर्टल पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन उनका निस्तारण केवल कागज़ों में हुआ, वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई। निर्माण को रोकने या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करने में वन विभाग गौतम बुद्ध नगर ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।


पर्यावरणविद ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला NGT के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीन बेल्ट को बचाना केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों और जनस्वास्थ्य का भी सवाल है। ऐसे प्रयासों से न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होगी, बल्कि शहर की हवा और जीवन गुणवत्ता भी सुरक्षित रहेगी।

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