Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● वॉलीबॉल चैंपियंस लीग: अयोध्या गर्जन और नम्मा बेंगलुरु स्मैशर्स की शानदार जीत ● क्लासरूम से समुदाय तक बच्चों की सुरक्षा पर शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने चलाया जागरूकता अभियान ● एम.एम.एच. कॉलेज में वन्यजीव सप्ताह का समापन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता ● गौतमबुद्ध नगर पुलिस में बड़ा फेरबदल, अभय कुमार मिश्र बने ADCP ग्रेटर नोएडा ● जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों का हंगामा, लखनऊ जाने वाली फ्लाइट करीब तीन घंटे लेट ● दिल्ली-NCR में बदलेगा मौसम, 9 अक्तूबर को बारिश और तेज हवाओं का अनुमान ● लखनऊ में गोमती की बाढ़ विकराल, प्लासियो मॉल और इकाना स्टेडियम के सामने भरा पानी ● ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: किसी का सामान जला तो किसी की जिंदगी भर की जमा-पूंजी ● ग्रेटर नोएडा में पेयजल समस्या पर RWA ने उठाई आवाज, CEO ने दिए स्थायी समाधान के निर्देश ● हमीरपुर के राठ में सपाइयों का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

नोएडा श्रमिक आंदोलन पर माकपा का आरोप: पुलिस हिरासत में मारपीट और फर्जी मामलों में फंसाने का दावा

नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।
top-news

नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।


माकपा के महासचिव एमए बेबी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में जमानत पर रिहा हुए श्रमिकों से मुलाकात की। इस दौरान श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें एक महीने तक जेल में रखा गया और कानूनी सहायता तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रतिनिधिमंडल में पोलित ब्यूरो सदस्य आर. अरुण कुमार, तपन सेन और राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन सहित अन्य नेता शामिल थे। माकपा ने यह भी दावा किया कि उन्हें जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।


माकपा ने आगे आरोप लगाया कि फैब्रैक्ट क्लोदिंग और विब्राकोस्टिक इंडिया जैसी कंपनियों में मजदूरों को संगठित होने से रोका जाता है और नेतृत्व करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। पार्टी ने कहा कि यूपी सरकार और प्रशासन की नीतियां श्रमिक आंदोलन को दबाने की दिशा में काम कर रही हैं। हालांकि, माकपा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह श्रमिकों को कानूनी और राजनीतिक समर्थन जारी रखेगी। पार्टी का दावा है कि मजदूरों की एकता ही इस तरह की कार्रवाई का सबसे मजबूत जवाब है और आने वाले समय में आंदोलन और तेज हो सकता है।