Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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यूपी में वर्ल्ड क्लास प्राइवेट बिजनेस पार्क! IT और GCC सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को निवेश और रोजगार का बड़ा हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को आगे बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत निजी डेवलपर्स की भागीदारी से आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां IT/ITeS, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), BPO और R&D कंपनियां आसानी से अपने ऑपरेशन शुरू कर सकेंगी। ये पार्क DBFOT (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) मॉडल पर विकसित होंगे, जिसमें डेवलपर को कम से कम 10 एकड़ भूमि पर प्रोजेक्ट बनाना होगा और 45 वर्षों तक संचालन का कंसेशन मिलेगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को निवेश और रोजगार का बड़ा हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को आगे बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत निजी डेवलपर्स की भागीदारी से आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां IT/ITeS, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), BPO और R&D कंपनियां आसानी से अपने ऑपरेशन शुरू कर सकेंगी। ये पार्क DBFOT (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) मॉडल पर विकसित होंगे, जिसमें डेवलपर को कम से कम 10 एकड़ भूमि पर प्रोजेक्ट बनाना होगा और 45 वर्षों तक संचालन का कंसेशन मिलेगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।


सरकार के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख IT और GCC हब बनाना है। इससे न केवल घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित किया जाएगा, बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। योजना के तहत डेवलपर्स को भूमि पंजीकरण पर 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी छूट दी जाएगी। साथ ही, पार्क के कुल क्षेत्रफल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा IT/ITeS और GCC कंपनियों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष हिस्से में प्रशिक्षण केंद्र, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और अन्य सहायक सेवाएं विकसित की जा सकेंगी।


बोली प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने दो प्रमुख मानदंड तय किए हैं. अपफ्रंट लैंड प्रीमियम और रेवेन्यू शेयर, जिन्हें 50-50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में कॉर्पोरेट निवेश में तेज़ी आएगी। तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होने से कंपनियों की सेटअप लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे उत्तर प्रदेश की “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” रैंकिंग और मजबूत होने की उम्मीद है। यह योजना राज्य को एक नए औद्योगिक और डिजिटल विकास इंजन के रूप में स्थापित कर सकती है।

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