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ग्रेटर नोएडा: खुले ड्रेन में गिरा 10 वर्षीय मासूम, एआरटीओ राजेश मोहन और टीम ने बचाई जान
ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है।
- sakshi choudhary
- 07 Jul, 2026
ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यथार्थ हॉस्पिटल के सामने यमुना प्राधिकरण की ओर स्थित सड़क पर खुले पड़े ड्रेन में गिरने से 10 वर्षीय मासूम की जान खतरे में पड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क किनारे बने ड्रेन का ढक्कन लंबे समय से खुला हुआ था, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए लगातार खतरा बना हुआ था। इसी दौरान वहां से गुजर रहा बच्चा अचानक संतुलन खो बैठा और सीधे गटर में जा गिरा। बेटे को गटर में गिरता देख उसकी मां की चीख-पुकार से आसपास अफरा-तफरी मच गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था और खुले पड़े गटरों की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी दौरान मौके से गुजर रहे एआरटीओ राजेश मोहन ने बिना समय गंवाए अपनी टीम के साथ तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया तथा गटर में उतरकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते किए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और बच्चे की जान बच गई। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उसके परिजनों ने राहत की सांस ली और एआरटीओ राजेश मोहन व उनकी टीम का आभार व्यक्त किया। मौके पर मौजूद लोगों ने भी टीम की त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि यदि कुछ मिनट की भी देरी होती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे खुले पड़े गटर और क्षतिग्रस्त ढक्कन लंबे समय से दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से इन्हें सुरक्षित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नागरिकों ने मांग की है कि क्षेत्र में खुले सभी ड्रेन को तत्काल ढका जाए, नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में किसी भी मासूम या राहगीर की जान खतरे में पड़ सकती है। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और जिम्मेदार संस्थाओं को तत्काल जवाबदेही तय करनी चाहिए।