Western Sydney University के भारत में पहले कैंपस के लिए बुधवार को ग्रेटर नोएडा में किरायानामे का पंजीकरण पूरा कर लिया गया। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही विश्वविद्यालय के भारत में संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। शुरुआती चरण में विश्वविद्यालय का अस्थायी कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्यालय भवन में संचालित किया जाएगा। इसके लिए प्राधिकरण मुख्यालय में वाणिज्यिक न्यायालय के ऊपर स्थित चार मंजिलों में लगभग 43 हजार वर्ग फुट क्षेत्र 22 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से किराये पर उपलब्ध कराया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्या श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल किरायानामे के पंजीकरण के लिए ग्रेटर नोएडा पहुंचा था और सभी आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दस्तावेज का विधिवत पंजीकरण कर दिया गया।
प्राधिकरण के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स स्थित Western Sydney University विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल है और शोध, नवाचार तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसकी विशेष पहचान है। भारत से पहले विश्वविद्यालय का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय कैंपस सिंगापुर में संचालित हो रहा है। अब भारत में इसका पहला कैंपस ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने जा रहा है, जो राष्ट्रीय शिक्षा परिदृश्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विश्वविद्यालय ने अपने स्थायी परिसर के निर्माण के लिए ग्रेटर नोएडा में लगभग 20 एकड़ भूमि की मांग की है। जब तक स्थायी कैंपस तैयार नहीं हो जाता, तब तक प्राधिकरण मुख्यालय में अस्थायी परिसर से शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इससे छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
विश्वविद्यालय के इस कैंपस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, सस्टेनेबल वॉटर फ्यूचर्स और एग्रीकल्चर जैसे भविष्य की जरूरतों पर आधारित आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इन कोर्सों के माध्यम से भारतीय छात्रों को देश में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे विदेश जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है। प्राधिकरण का अनुमान है कि नवंबर 2026 तक इस कैंपस में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इससे ग्रेटर नोएडा न केवल वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर अपनी नई पहचान स्थापित करेगा, बल्कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और निवेशकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से स्थानीय छात्रों के साथ-साथ देशभर के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।