ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधीन संचालित सफाई कार्य में बाधा डालने, सफाई कर्मचारियों से अभद्रता करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में पुलिस ने तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें दो मामले बीटा-2 कोतवाली और एक मामला सूरजपुर कोतवाली में दर्ज हुआ है। पुलिस के अनुसार सभी एफआईआर अलग-अलग शिकायतकर्ताओं की तहरीर पर दर्ज की गई हैं। पहली शिकायत खासपुर गांव निवासी लोकेश कुमार शर्मा ने दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वह प्राधिकरण की अधिकृत एजेंसी के माध्यम से सेक्टर पी-3 क्षेत्र में सफाई कार्य करवा रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान बेगाबाद, जेवर निवासी रवीर जंघारा और उसके साथ मौजूद कुछ अन्य लोग मौके पर पहुंचे तथा सफाई कार्य रुकवा दिया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सफाई कर्मचारियों से झाड़ू, फावड़े समेत अन्य उपकरण छीन लिए, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और दोबारा सफाई करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
दूसरी प्राथमिकी साकीपुर निवासी हेमराज शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई है। उन्होंने भी आरोप लगाया कि सेक्टर पी-3 में सफाई कार्य के दौरान अजपुर गढ़ी निवासी राकेश और कुछ अन्य लोग मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को काम करने से रोक दिया। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने सफाई कर्मियों के साथ अभद्रता की, सफाई उपकरण छीन लिए और जान से मारने की धमकी दी। बीटा-2 कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य प्रबंधक की ओर से दर्ज कराई गई तीसरी शिकायत में अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के सुनील मकवाना, उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के रनवीर जंगहारा और नितिन कीर, एमसीडी स्वच्छता कर्मचारी यूनियन के नितिन छजलाना और सोनू चंडालिया तथा राष्ट्रीय सफाई मजदूर यूनियन के राहुल पाली को नामजद किया गया है। सूरजपुर कोतवाली प्रभारी उमेश नैथानी के अनुसार मामले में करीब 39 सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और जांच जारी है।
इसी बीच सफाई कर्मचारियों के आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया है। विभिन्न मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाहर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों में से शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी 39 सफाईकर्मियों को मंगलवार को जेल से रिहा कर दिया गया। जेल अधीक्षक ब्रजेश सिंह ने उनकी रिहाई की पुष्टि की। कर्मचारियों की रिहाई के बाद उनके परिजनों और साथियों ने राहत की सांस ली। उल्लेखनीय है कि आंदोलन के दौरान रविवार देर रात पुलिस ने करीब 70 सफाई कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेजा था, जिनमें से 39 को शांतिभंग की कार्रवाई के तहत जेल भेजा गया था। अब एक ओर जहां सफाई कार्य में बाधा और धमकी के मामलों की पुलिस जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों की मांगों और आंदोलन को लेकर भी प्रशासन की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।