Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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गौतमबुद्धनगर: DM मेधा रूपम का बड़ा एक्शन, 3 करोड़ की सरकारी जमीन फर्जीवाड़े में महिला लेखपाल नीरज लता सस्पेंड

गौतमबुद्धनगर में सरकारी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े पर नवागत जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सदर तहसील में तैनात महिला लेखपाल नीरज लता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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गौतमबुद्धनगर में सरकारी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े पर नवागत जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सदर तहसील में तैनात महिला लेखपाल नीरज लता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि लेखपाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बंजरपुर गांव स्थित करीब 450 वर्ग मीटर सरकारी जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उसकी घरोनी अपने पति के नाम दर्ज करा दी। इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल जांच शुरू कराई। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्तियों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बंजरपुर गांव के स्थानीय ग्रामीणों को सरकारी अभिलेखों में दर्ज जमीन को लेकर गड़बड़ी का संदेह हुआ। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत सीधे जिला प्रशासन से की, जिसके बाद जिलाधिकारी मेधा रूपम ने मामले की जांच सदर एसडीएम आशुतोष को सौंपी। प्राथमिक जांच के दौरान आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने बिना देरी किए महिला लेखपाल को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। प्रशासन का मानना है कि सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की हेराफेरी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि इससे सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल की जा सके और यदि कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

जानकारी के अनुसार, निलंबित महिला लेखपाल नीरज लता पिछले लगभग छह वर्षों से गौतमबुद्धनगर जिले की सदर तहसील में तैनात थीं। लंबे समय से एक ही तहसील में तैनाती के बीच हुई इस कार्रवाई से राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन में हलचल मच गई है। सदर एसडीएम आशुतोष ने बताया कि विभागीय जांच के दौरान यदि किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका भी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा और राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिलाधिकारी मेधा रूपम की इस त्वरित कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी जमीनों से जुड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।