Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा की सोसाइटी में दूषित पानी का मामला, 7 नए सैंपल जांच के लिए भेजे

ग्रेटर नोएडा की सेवियर ग्रीन आर्च सोसाइटी में दूषित पेयजल की शिकायतों ने चिंता बढ़ा दी है। पानी के नमूनों की जांच में ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की पुष्टि होने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लिया है।
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ग्रेटर नोएडा की सेवियर ग्रीन आर्च सोसाइटी में दूषित पेयजल की शिकायतों ने चिंता बढ़ा दी है। पानी के नमूनों की जांच में ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया मिलने की शिकायत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लिया है।  प्राधिकरण के जल विभाग की टीम ने सोसाइटी का निरीक्षण किया और पानी की गुणवत्ता की जांच की। अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों से 7 नए पानी के सैंपल लिए हैं, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए लैब भेजा गया है। इन सैंपल की रिपोर्ट करीब 2 से 3 दिनों में आने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद ही पानी की गुणवत्ता और दूषित होने के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


प्राधिकरण की टीम ने सोसाइटी में पानी में क्लोरीन, टीडीएस और अन्य गुणवत्ता मानकों की भी जांच की। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि पानी दूषित होने की समस्या सोसाइटी के आंतरिक पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि उसकी जिम्मेदारी मुख्य गेट तक पेयजल आपूर्ति करने की है, जबकि सोसाइटी के अंदर की पाइपलाइन, रखरखाव और जल वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी बिल्डर और सोसाइटी प्रबंधन की है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोसाइटी के भीतर पानी पहुंचाने वाला पूरा नेटवर्क सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप है? अगर पाइपलाइन में लंबे समय से कोई खामी थी, तो उसका समय रहते निरीक्षण और रखरखाव क्यों नहीं किया गया?


दूषित पानी की शिकायतों के बीच सोसाइटी में आयोजित हेल्थ कैंप में करीब 25 लोगों ने पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद निवासियों में बीमारी और पेयजल की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। 7 नए सैंपल की लैब रिपोर्ट आने के बाद यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पानी की समस्या कितनी गंभीर है और इसका वास्तविक स्रोत क्या है। इस मामले ने ग्रेटर नोएडा की अन्य हाउसिंग सोसाइटियों में भी पेयजल की नियमित जांच और पाइपलाइन के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्राधिकरण और सोसाइटी प्रबंधन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। सोसाइटी के अंदर की ज़िम्मेदारी सोसाइटी प्रबंधन की होती है, प्राधिकरण केवल सोसाइटी के गेट तक पानी पहुँचाता है।