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ग्रेटर नोएडा में किसानों के प्रदर्शन से पहले प्रशासन की तैयारी पर सवाल

किसानों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर प्रशासन की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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किसानों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर प्रशासन की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को प्राधिकरण कार्यालय के बाहर उस स्थान पर मिट्टी के ढेर दिखाई दिए, जहां किसान आमतौर पर धरना-प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा मेट्रो स्टेशन के नीचे डंपर और जेसीबी खड़ी नजर आईं। किसानों ने इन व्यवस्थाओं को लेकर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी मांगों को सुनने और बातचीत करने के बजाय प्रशासन प्रदर्शन स्थल को रोकने की तैयारी कर रहा है।


किसान नेताओं का आरोप है कि प्राधिकरण पहुंचने से पहले ही कई स्थानों पर रास्ते रोकने और आवाजाही नियंत्रित करने की व्यवस्था की जा रही है। किसानों का सवाल है कि जिस जगह वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना देते हैं, वहां अचानक मिट्टी के ढेर क्यों डाले गए? किसानों का कहना है कि प्रशासन को आंदोलन स्थल पर अवरोध खड़े करने के बजाय उनकी लंबित समस्याओं पर बातचीत करनी चाहिए। प्रदर्शन को देखते हुए प्राधिकरण कार्यालय के आसपास पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी दिखाई दी। इससे किसानों के बीच प्रशासन की मंशा को लेकर नाराजगी बढ़ गई है।


दरअसल, किसानों की ओर से 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, आबादी से जुड़े लंबित मामलों और जमीन अधिग्रहण से संबंधित मांगों को लेकर आंदोलन का आह्वान किया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं और वे इन्हीं मुद्दों को लेकर प्राधिकरण के सामने अपनी आवाज उठाना चाहते हैं। अब प्रदर्शन से पहले धरना स्थल पर मिट्टी के ढेर, डंपर और जेसीबी खड़े किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखना उनका अधिकार है और प्रशासन को रास्ता रोकने के बजाय समाधान के लिए वार्ता करनी चाहिए। हालांकि, धरना स्थल पर मिट्टी डाले जाने और मशीनरी खड़ी करने के प्रशासनिक कारणों को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

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