Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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यूपी 2027: दादरी से चुनावी बिगुल फूंकेगी समाजवादी पार्टी, जानिए पूरी रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी सियासी तैयारी को औपचारिक रूप से धार दे दी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च 2026 को नोएडा के दादरी से “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” के जरिए चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। यह रैली सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सपा के मिशन 2027 का पहला बड़ा सियासी संकेत मानी जा रही है। इसके बाद इसी तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैलियां आयोजित की जाएंगी। इस अभियान की जिम्मेदारी सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी को सौंपी गई है। पार्टी का फोकस उन इलाकों पर है जहां 2022 विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी सियासी तैयारी को औपचारिक रूप से धार दे दी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च 2026 को नोएडा के दादरी से “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” के जरिए चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। यह रैली सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सपा के मिशन 2027 का पहला बड़ा सियासी संकेत मानी जा रही है। इसके बाद इसी तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैलियां आयोजित की जाएंगी। इस अभियान की जिम्मेदारी सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी को सौंपी गई है। पार्टी का फोकस उन इलाकों पर है जहां 2022 विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था।


दादरी और नोएडा जैसे क्षेत्रों से अभियान शुरू करने के पीछे सपा की साफ रणनीति है। यह इलाका अब तक पार्टी का कमजोर गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन सपा मानती है कि यदि यहां संगठनात्मक मजबूती लाई गई तो पूरे पश्चिमी यूपी के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। रैलियों के साथ-साथ पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जातीय समीकरण, स्थानीय स्वीकार्यता और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। हर सीट पर सर्वे कराया जा रहा है ताकि टिकट वितरण में कोई चूक न हो और बूथ-लेवल मैनेजमेंट मजबूत किया जा सके।


नोएडा से अभियान की शुरुआत को सपा ‘शुभ संकेत’ के रूप में भी देख रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि 2012 में अखिलेश यादव ने गौतमबुद्धनगर से साइकिल यात्रा शुरू की थी और उसी साल सत्ता में वापसी हुई थी। वहीं नोएडा को लेकर लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक मिथक कि यहां जाने वाला मुख्यमंत्री सत्ता गंवा देता है को भी सपा अब तोड़ना चाहती है। 2017 और 2022 में अलग जिलों से अभियान शुरू करने के बावजूद सत्ता से दूरी के बाद, इस बार दादरी से शुरुआत कर सपा राजनीतिक धारणा बदलने की कोशिश में है।

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