Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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भारत टैक्सी सर्विस लॉन्च: ओला-उबर को मिलेगी टक्कर? अमित शाह ने गुजरात से शुरू किया ड्राइवर-ओन्ड कैब मॉडल

भारत में कैब सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात में 'भारत टैक्सी सर्विस' का शुभारंभ किया है, जिसे देश का पहला ड्राइवर-ओन्ड राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।
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भारत में कैब सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात में 'भारत टैक्सी सर्विस' का शुभारंभ किया है, जिसे देश का पहला ड्राइवर-ओन्ड राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है। इस नई पहल का उद्देश्य निजी कैब कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देना और ड्राइवरों को सीधे मालिकाना हक देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। फिलहाल इस सेवा की शुरुआत गुजरात के 14 प्रमुख शहरों से की गई है, जबकि सरकार का लक्ष्य अगले एक महीने के भीतर पूरे राज्य में इसका विस्तार करना है। सहकारिता मॉडल पर आधारित यह प्लेटफॉर्म यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद सेवा देने के साथ-साथ ड्राइवरों को अधिक कमाई और फैसले लेने का अधिकार भी देगा।


लॉन्चिंग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि देश में तेजी से बढ़ती टैक्सी सेवाओं की मांग के बीच निजी कंपनियों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई हैं। यात्रियों ने लगातार मनमाने किराए, राइड कैंसिलेशन और सेवा संबंधी शिकायतें की हैं, वहीं ड्राइवरों ने भी कमाई और कमीशन को लेकर अपनी परेशानियां सरकार के सामने रखी थीं। शाह ने बताया कि शुरुआत में इन कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए नया कानून बनाने पर विचार किया गया था, लेकिन केवल कानूनी प्रावधान किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। इसी सोच के साथ सरकार ने ऐसा सहकारी मॉडल विकसित करने का फैसला किया, जिसमें ड्राइवर ही प्लेटफॉर्म के वास्तविक मालिक होंगे और मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे उन्हीं तक पहुंचेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत टैक्सी सर्विस गुजरात में सफल रहती है, तो यह भारत के राइड-हेलिंग सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है। सहकारिता आधारित यह मॉडल निजी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ड्राइवरों के हितों की बेहतर सुरक्षा कर सकता है। इससे यात्रियों को पारदर्शी किराया, बेहतर सेवा और अधिक जवाबदेही मिलने की संभावना है। सरकार का विश्वास है कि जिस तरह डेयरी, बैंकिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहकारिता मॉडल ने सफलता हासिल की है, उसी तरह टैक्सी सेक्टर में भी यह मॉडल नई मिसाल कायम कर सकता है। आने वाले समय में यदि इसे देशभर में लागू किया जाता है, तो यह Ola, Uber जैसी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है और भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है।