Health Alert: शरीर में कॉपर की कमी से कमजोर हो सकती है इम्युनिटी, दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है असर
- sakshi choudhary
- 24 Oct, 2026
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए केवल विटामिन और प्रोटीन ही नहीं, बल्कि कई जरूरी मिनरल्स की भी आवश्यकता होती है। इन्हीं में से एक है कॉपर (Copper), जो शरीर में खून बनाने, आयरन को इस्तेमाल करने, नसों को स्वस्थ रखने और रोगों से लड़ने की क्षमता बनाए रखने में मदद करता है। अगर शरीर में लंबे समय तक कॉपर की कमी बनी रहे, तो इसका असर सेहत के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। कुछ गंभीर मामलों में दिल की सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
कॉपर की कमी आमतौर पर कम देखने को मिलती है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि संतुलित आहार के जरिए शरीर को इस मिनरल की पर्याप्त मात्रा मिल सकती है।
दिल की सेहत के लिए क्यों जरूरी है कॉपर?
कॉपर शरीर में कई ऐसे काम करता है, जो दिल और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह उन एंजाइमों के काम में सहायक होता है, जो शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा देने और ऊतकों को स्वस्थ बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।
कुछ शोधों में कॉपर की कमी और हृदय से जुड़ी समस्याओं के बीच संबंध देखा गया है। इसकी कमी से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कॉपर की कमी होने पर हर व्यक्ति को दिल की बीमारी हो जाएगी।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक मिनरल पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच भी जरूरी है।
कॉपर की कमी से कमजोर हो सकती है इम्युनिटी
हमारे शरीर में इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। यह शरीर को बैक्टीरिया और दूसरे हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ने में मदद करती है। इस व्यवस्था को ठीक से काम करने के लिए कॉपर की भी जरूरत होती है।
कॉपर की गंभीर कमी होने पर सफेद रक्त कोशिकाओं की एक महत्वपूर्ण किस्म, न्यूट्रोफिल, की संख्या घट सकती है। इस स्थिति को न्यूट्रोपेनिया कहा जाता है। न्यूट्रोफिल शरीर को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी संख्या कम होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए शरीर में कॉपर की कमी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। बार-बार संक्रमण होना कई कारणों से हो सकता है, इसलिए केवल इसी लक्षण के आधार पर कॉपर की कमी मान लेना सही नहीं है।
त्वचा, हड्डियों और नसों के लिए भी जरूरी
कॉपर शरीर में कोलेजन और इलास्टिन जैसे प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया में मदद करता है। ये प्रोटीन त्वचा, हड्डियों और शरीर के दूसरे ऊतकों को मजबूती और लचीलापन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, कॉपर तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज और आयरन के सही इस्तेमाल में भी मदद करता है। इसकी गंभीर कमी होने पर खून की कमी, थकान, कमजोरी और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, थकान या कमजोरी के पीछे आयरन की कमी, नींद की कमी और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
इन खाद्य पदार्थों से पूरी करें कॉपर की जरूरत
कॉपर की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए रोजमर्रा के खाने में कुछ पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती हैं।
मेवे और बीज: काजू, बादाम, तिल और सूरजमुखी के बीज।
साबुत अनाज: ओट्स और दूसरे साबुत अनाज।
दालें और फलियां: चना, राजमा और दालें।
अन्य खाद्य पदार्थ: मशरूम, डार्क चॉकलेट, समुद्री भोजन और कुछ प्रकार के मांस।
फल और सब्जियां: एवोकाडो सहित कई फल और सब्जियां संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं।
वयस्कों के लिए कॉपर की सामान्य अनुशंसित दैनिक मात्रा लगभग 900 माइक्रोग्राम है। यह मात्रा उम्र, गर्भावस्था और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।
ध्यान रखें कि कॉपर के बर्तन में पानी रखने से शरीर को कितनी मात्रा में कॉपर मिलता है, यह निश्चित नहीं होता। इसलिए इसे कॉपर की जरूरत पूरी करने का भरोसेमंद तरीका नहीं मानना चाहिए।