Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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नौतपा और हीटवेव का डबल अटैक! बढ़ती गर्मी और ह्यूमिडिटी से बिगड़ रही सेहत, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में नौतपा के दौरान भीषण गर्मी और बढ़ती ह्यूमिडिटी ने लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। तापमान कई इलाकों में 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि नमी के कारण “फील लाइक” तापमान और भी ज्यादा महसूस हो रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, लो ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त और हीट स्ट्रोक जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार मरीज अधिक प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम पसीने के जरिए काम करता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और नमी में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।
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दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में नौतपा के दौरान भीषण गर्मी और बढ़ती ह्यूमिडिटी ने लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। तापमान कई इलाकों में 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि नमी के कारण “फील लाइक” तापमान और भी ज्यादा महसूस हो रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, लो ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त और हीट स्ट्रोक जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार मरीज अधिक प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम पसीने के जरिए काम करता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और नमी में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।


विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि ह्यूमिडिटी इस समय सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आ रही है। अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, ज्यादा नमी होने पर पसीना ठीक से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। इससे हार्ट, किडनी और ब्रेन पर दबाव बढ़ता है और गंभीर मामलों में किडनी फेलियर या हीट स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन जरूरी है। ORS, नारियल पानी, नींबू पानी और हल्का नमक-शक्कर मिला तरल शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही भारी, मसालेदार और तला हुआ भोजन कम करने और हल्के, पानी युक्त फलों का सेवन बढ़ाने की सलाह दी गई है।


डॉक्टरों ने यह भी चेतावनी दी है कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और सुबह या शाम के ठंडे समय में ही यात्रा करें। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना, सिर को ढककर रखना और नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को अत्यधिक पसीना, कमजोरी, चक्कर, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। समय पर सावधानी और सही खानपान अपनाकर नौतपा और हीटवेव के खतरनाक प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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