Kidney Health: परिवार में किसी को किडनी की बीमारी है? जानें आपको कितना खतरा, समय पर कराएं ये 4 जरूरी जांच
- sakshi choudhary
- 26 Oct, 2026
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने और कई जरूरी कामों में मदद करती है। लेकिन आजकल खराब खानपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और गलत जीवनशैली के कारण किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। अगर आपके परिवार में पहले से किसी को किडनी की बीमारी रही है, तो आपको अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, परिवार में किसी को किडनी रोग होने का मतलब यह नहीं है कि आपको भी यह बीमारी जरूर होगी। सही समय पर जांच और स्वस्थ आदतों से जोखिम को समझने और किडनी की सेहत का ध्यान रखने में मदद मिल सकती है।
परिवार में किडनी की बीमारी होने पर कितना बढ़ता है खतरा?
किडनी की कुछ बीमारियां आनुवंशिक कारणों से हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) एक ऐसी बीमारी है, जो परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकती है। इसके अलावा, अगर परिवार में डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रही है, तो इन बीमारियों के प्रति आपकी संवेदनशीलता बढ़ सकती है। डायबिटीज और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। किडनी की बीमारी की शुरुआती अवस्था में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए केवल शरीर में परेशानी महसूस होने का इंतजार करने के बजाय डॉक्टर की सलाह से जरूरी जांच कराना बेहतर है।
किडनी की सेहत जानने के लिए कौन-सी 4 जांच जरूरी हैं?
आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों के आधार पर डॉक्टर इन जांचों की सलाह दे सकते हैं।
1. खून में क्रिएटिनिन की जांच
क्रिएटिनिन शरीर में मांसपेशियों की सामान्य गतिविधि से बनने वाला पदार्थ है। खून में इसका स्तर जांचकर eGFR का अनुमान लगाया जाता है। eGFR से पता चलता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है।
2. पेशाब में एल्ब्यूमिन की जांच
यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो (UACR) से पेशाब में एल्ब्यूमिन नाम के प्रोटीन की असामान्य मात्रा का पता लगाया जा सकता है। इसकी मात्रा बढ़ना किडनी को नुकसान पहुंचने का शुरुआती संकेत हो सकता है।
3. ब्लड प्रेशर की जांच
हाई ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, किडनी की बीमारी के कारण भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसलिए नियमित रूप से रक्तचाप की जांच करना जरूरी है।
4. ब्लड शुगर की जांच
डायबिटीज किडनी की बीमारी का एक प्रमुख कारण है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे ब्लड शुगर के स्तर और उसके नियंत्रण का पता लगाने में मदद मिलती है।
ध्यान रखें कि हर व्यक्ति को एक जैसी जांच या एक ही अंतराल पर जांच कराने की जरूरत नहीं होती। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके पारिवारिक इतिहास और स्वास्थ्य के अनुसार जांच कब करानी चाहिए।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में सुधार करना फायदेमंद हो सकता है।
नमक कम खाएं: अधिक नमक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जिससे किडनी पर दबाव पड़ता है।
संतुलित भोजन करें: सब्जियां, फल और संतुलित आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
नियमित व्यायाम करें: अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना शारीरिक गतिविधि करें और वजन नियंत्रित रखें।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर संभालें: अगर इनमें से कोई समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रण बनाए रखें।
धूम्रपान से बचें: धूम्रपान रक्त वाहिकाओं और किडनी की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
पेनकिलर का बार-बार इस्तेमाल न करें: कुछ दर्द निवारक दवाएं, खासकर NSAIDs, लंबे समय तक या गलत तरीके से लेने पर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दवा लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर परिवार में कम उम्र में किडनी की बीमारी, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज या बार-बार किडनी फेल होने का इतिहास है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर विशेष जांच या जेनेटिक काउंसलिंग की सलाह दे सकते हैं। पेशाब में खून आना, पैरों या चेहरे पर लगातार सूजन, पेशाब में असामान्य बदलाव या लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं और शुरुआती किडनी रोग बिना लक्षणों के भी मौजूद हो सकता है।