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बिरौंडी गांव में कूड़े का संकट: GNIDA कार्यालय के पास किसान आबादी भूखंड बने Garbage Dumping Zone
ग्रेटर नोएडा में स्वच्छता और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बिरौंडी गांव की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
- sakshi choudhary
- 09 Jun, 2026
ग्रेटर नोएडा में स्वच्छता और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बिरौंडी गांव की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) कार्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित किसान आबादी भूखंड इन दिनों कूड़े और निर्माण मलबे के बड़े-बड़े ढेरों से पटे हुए हैं। खुले में फैला Garbage, सड़ता हुआ कचरा और गंदगी न केवल क्षेत्र की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार कूड़े के ढेरों से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहना मुश्किल हो गया है। मच्छरों की बढ़ती संख्या और संक्रमण फैलने की आशंका ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। जिस क्षेत्र में Cleanliness और Waste Management की निगरानी सबसे बेहतर होनी चाहिए, वहीं गंदगी का यह आलम प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि किसान आबादी भूखंडों से कूड़े के ढेर हटाए जाएं, नियमित सफाई अभियान चलाया जाए और अवैध रूप से कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बिरौंडी गांव की यह समस्या अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह Urban Development, Public Health और Environmental Management से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुकी है।