Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● Chinese App Ban: ई-रिक्शा रोकने वाले BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion ऐप पर केंद्र का बड़ा एक्शन ● नोएडा की दो सगी बहनों ने शूटिंग में रचा इतिहास, यूपी स्टेट चैंपियनशिप में जीते 4 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक ● CGWA Report 2025: देश के भूजल में बढ़ रहा धीमा जहर, दिल्ली में नाइट्रेट और पंजाब में यूरेनियम प्रदूषण सबसे गंभीर ● नोएडा में 5 जुलाई को MGUP स्टेट कराटे चैंपियनशिप 2026, 150 खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए आजमाएंगे किस्मत ● दिल्ली में बारिश से बदला मौसम का मिजाज, IMD का येलो अलर्ट जारी; जानिए कब होगी मानसून की एंट्री ● यूपी में भ्रष्टाचार और वसूली का खेल जारी, अखिलेश यादव का योगी सरकार पर बड़ा हमला ● UP Police Transfer 2026: यूपी पुलिस में 125 डिप्टी एसपी के तबादले, देखें किस अधिकारी को कहां मिली नई तैनाती ● ग्रेटर नोएडा में 1200 करोड़ का इंटिग्रेटेड मास्टर प्लान, जलापूर्ति-सीवर और ड्रेनेज सिस्टम होगा हाईटेक ● खेरली नहर से सिरसा गोलचक्कर तक सड़क चौड़ीकरण शुरू, 7 किमी मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत ● ऑपरेशन कन्विक्शन की बड़ी कामयाबी! बादलपुर हत्याकांड में 9 दोषियों को उम्रकैद

ग्रेटर नोएडा में ‘भूमि लूट’ का खेल! प्राधिकरण की मिलीभगत से खड़े हो रहे अवैध साम्राज्य

ग्रेटर नोएडा में बढ़ते अवैध निर्माणों को लेकर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। सड़क और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर बहुमंजिला निर्माण होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से केवल सांकेतिक कार्रवाई की जाती है और बाद में निर्माण फिर शुरू हो जाता है। भूमि विभाग की निष्क्रियता और सरकारी जमीनों पर बढ़ते कब्जों को लेकर लोग हजारों करोड़ रुपये के संभावित भूमि घोटाले की आशंका जता रहे हैं तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
top-news

हजारों करोड़ के भूमि घोटाले की आहट! अवैध निर्माणों ने खोली प्राधिकरण की पोल

ग्रेटर नोएडा

ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माण अब प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों से कभी सड़कें और सार्वजनिक रास्ते प्रस्तावित थे, आज वहां बहुमंजिला अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं। हालत यह है कि प्राधिकरण की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की जमीन या तो कब्जों की भेंट चढ़ रही है या फिर बेकार पड़ी हुई है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता?

स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब उन इलाकों में भी तेजी से अवैध निर्माण शुरू हो चुका है, जहां पहले खाली जमीन हुआ करती थी। शिकायतें लगातार की जा रही हैं, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं।

‘सांकेतिक कार्रवाई’ का खेल, फिर शुरू हो जाता है निर्माण

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में पहले से ही संबंधित लोगों को सूचना दे दी जाती है कि “सिर्फ सांकेतिक कार्रवाई” होगी। बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई महज दिखावे तक सीमित रहती है, जबकि कुछ समय बाद निर्माण कार्य फिर उसी रफ्तार से शुरू हो जाता है। बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा सिस्टम हाईटेक हो चुका है और निगरानी व सर्वे पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब भी प्राधिकरण को अवैध निर्माणों की जानकारी क्यों नहीं होती?

एक-एक ईंट की जानकारी, फिर भी चुप क्यों अधिकारी?

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि किसी इलाके में एक ईंट भी लगती है तो कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी होती है। इसके बावजूद यह तय किया जाता है कि उस निर्माण को हटाना है या उसे जारी रहने देना है। यही वजह है कि अब लोग खुले तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाने लगे हैं।

भूमि विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल भूमि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। प्राधिकरण का भूमि विभाग वर्षों से निष्क्रिय दिखाई दे रहा है। एक ओर अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण और संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा। लोगों का आरोप है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो यह हजारों करोड़ रुपये के भूमि घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल में जितना अवैध निर्माण हुआ, उनकी जवाबदेही तय की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि आखिर किसके संरक्षण में लगातार सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण फल-फूल रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *