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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला: अवैध कॉलोनियों को ऋण देने पर रोक की माँग, पहले माँगे ये पेपर

बिसरख, तुश्याना, सुथ्याना, हिंडन नदी डूब क्षेत्र, छपराौला, तिलपता, चिटेहरा, धूम मानिकपुर, खेड़ी, भनौता, जलपुरा, सुनपुरा, सैनी, वैदपुरा, सादुल्लापुर, अच्छेजा, आमका और खोदना खुर्द आदि गावों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चल रहा है।
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ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने एक अहम कदम उठाते हुए सभी बैंकों को पत्र लिख कर महाप्रबंधक परियोजना ए के सिंह ने बताया हैं कि वे अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अवैध कॉलोनियों/विला निर्माणों को ऋण न दें। यह फैसला तेजी से फैल रही अवैध कॉलोनियों, विला और फ्लैट पर लगाम लगाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। अवैध कॉलोनी, विला और फ्लैट को ऋण देने से प्राधिकरण को हानि हो रही है जिसके कारण क्षेत्र में अवैध निर्माण तेज़ी से बढ़ रहा है प्राधिकरण को विकास के लिए ज़मीन मिलना मुश्किल हो रहा है इसीलिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बैंकों से अनुरोध किया है कि वे अवैध निर्माण में भागीदार न बने, बल्कि अवैध कॉलोनी, विला और फ्लैट को ऋण न देकर गरीबों और भोली भाली जनता को लूटने से बचाए।

क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी अधिसूचना के तहत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को कुल 264 गाँवों को अधिसूचित किया गया था। इन क्षेत्रों को औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित किया गया था। इसके बावजूद, प्राधिकरण की अनुमति के बिना यहां अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कार्य जारी है। प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दलाल और भूमाफिया गरीबों को सस्ती ज़मीन का झांसा देकर अवैध प्लॉट, विला और फ्लैट बेच रहे हैं और लोग बिना नक्शा पास कराए मकान बना रहे हैं। लोग बैंक ऋण के लिए आवेदन करते हैं बैंक के द्वारा ऋण दिया जाता है, जिससे बैंकों द्वारा अनजाने में अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।

प्राधिकरण ने सभी क्षेत्रीय बैंक प्रबंधकों को कहा है कि:
* अधिसूचित क्षेत्र में बिना स्वीकृत ले-आउट प्लान के बने मकानों/प्लॉट्स को ऋण न दिया जाए।
* यदि कोई व्यक्ति/संस्था अवैध निर्माण पर लोन के लिए आवेदन करता है और वह प्राधिकरण से अनुमोदित नहीं है, तो उस पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
* ऐसे ऋणों की स्वीकृति प्राधिकरण के आदेशों के विपरीत मानी जाएगी और उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 की धारा 10 के अंतर्गत इसे अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा जाएगा।

क्या होगा असर?
इस निर्णय से न केवल अवैध कॉलोनियों, विला और फ्लैट पर अंकुश लगेगा, बल्कि ग्रेटर नोएडा के नियोजित विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह कदम राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों को मजबूती देगा और भविष्य में अवैध कब्जों और प्लॉटिंग से बचाव करेगा। गरीबों और भोली भाली जनता को लूटने से बच सकती है। इन अवैध कालोनियों में प्लॉट, विला या फ्लैट ख़रीदने से पहले लोगों को कॉलोनाइजर उसे प्राधिकरण से पास नक़्शा और NOC की माँग करनी चाहिए। अवैध निर्माण करने वालों के पास प्राधिकरण से कोई भी पेपर नहीं होता है इसलिए ये सभी अवैध है उन्हें भविष्य में ध्वस्त किया जाएगा और इन पर सख़्त से सख़्त कार्रवाई होगी। बिसरख, तुश्याना, सुथ्याना, हिंडन नदी डूब क्षेत्र, छपराौला, तिलपता, चिटेहरा, धूम मानिकपुर, खेड़ी, भनौता, जलपुरा, सुनपुरा, सैनी, वैदपुरा, सादुल्लापुर, अच्छेजा, आमका और खोदना खुर्द आदि गावों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चल रहा है। 

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