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विकास के साथ नई सड़कों पर भी जोर दे प्राधिकरण, सरकारी जमीन से इकोटेक-16 के लिए निकल सकता है बेहतर रास्ता
ग्रेटर नोएडा में विकास कार्यों के साथ सड़क परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करना जरूरी है। जहां तत्काल चौड़ीकरण की जरूरत नहीं है, वहां का बजट नई वैकल्पिक सड़कों पर लगाया जा सकता है। लोहिया नाले के आसपास उपलब्ध सरकारी जमीन का उपयोग कर खोदना से 130 मीटर रोड तक दो लेन की सड़क बनाने की संभावना तलाशने से इकोटेक-16, 18 और 19 समेत आसपास के गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
- Kapil Choudhary
- 12 Aug, 2026
ग्रेटर नोएडा में इन दिनों विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण और अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। विकास कार्य किसी भी तेजी से बढ़ते शहर के लिए बेहद जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि पैसे का इस्तेमाल वहीं किया जाए जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। प्राधिकरण को सड़क चौड़ीकरण के कामों की प्राथमिकता तय करनी चाहिए। जहां सड़क पहले से पर्याप्त चौड़ी है और वहां तत्काल चौड़ीकरण की जरूरत नहीं है, वहां होने वाले खर्च को किसी दूसरी जरूरी परियोजना में लगाया जा सकता है।
नई सड़कों पर बढ़ाना होगा जोर
ग्रेटर नोएडा लगातार विस्तार कर रहा है। नए सेक्टर विकसित हो रहे हैं, औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है और गांवों से शहर की कनेक्टिविटी भी बढ़ रही है। ऐसे में केवल पुरानी सड़कों को चौड़ा करने के बजाय नई वैकल्पिक सड़कों का नेटवर्क तैयार करना भी जरूरी है। हालांकि नई सड़क बनाने के लिए जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को कई जगह जमीन खरीदने में परेशानी आ रही है। जमीन खरीदने में समय और पैसा दोनों लगते हैं, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पातीं।
सरकारी जमीन का इस्तेमाल बन सकता है बेहतर विकल्प
ऐसे में प्राधिकरण को उन विकल्पों पर काम करना चाहिए जहां बिना बड़े स्तर पर जमीन खरीद के नई सड़क बनाई जा सके। पुराना लोहिया नाला इसका एक अच्छा उदाहरण बन सकता है। लोहिया नाला कैलाशपुर होते हुए 130 मीटर रोड को पार करता है। इसके आसपास सरकारी भूमि उपलब्ध है। यदि तकनीकी और राजस्व स्तर पर जांच के बाद यह जमीन सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त पाई जाती है, तो यहां दो लेन की सड़क विकसित करने की संभावना तलाशी जा सकती है।
खोदना से 130 मीटर रोड तक बन सकती है कनेक्टिविटी
इस रास्ते को विकसित करने से खोदना से 130 मीटर रोड तक सीधी कनेक्टिविटी मिल सकती है। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा। खास बात यह है कि खोदना से खेड़ी होते हुए इकोटेक-16 तक पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क निर्माण का काम चल रहा है। ऐसे में यदि खोदना से आगे 130 मीटर रोड तक लोहिया नाले के साथ उपलब्ध सरकारी जमीन का उपयोग करते हुए सड़क बनाई जाती है, तो एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग तैयार हो सकता है।
इकोटेक-16, 18 और 19 को मिलेगा फायदा
इस सड़क का फायदा केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इकोटेक-16, इकोटेक-18 और इकोटेक-19 जैसे औद्योगिक सेक्टरों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है। इसके अलावा खोदना कलां, सौराजपुर, कैलाशपुर और खेड़ी सहित आसपास के गांवों के लोगों को भी आवागमन का बेहतर विकल्प मिल सकता है। इससे मौजूदा मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
विकास जरूरी है, लेकिन प्राथमिकता उससे भी जरूरी
लोहिया नाले के साथ उपलब्ध सरकारी जमीन का इस्तेमाल कर सड़क बनाने का विकल्प प्राधिकरण के लिए एक उपयोगी मॉडल साबित हो सकता है। जरूरत है तो सिर्फ मौके का सर्वे, जमीन की स्थिति की जांच और व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की। अगर यह रास्ता तकनीकी रूप से संभव होता है, तो आने वाले समय में यह ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के गांवों के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग साबित हो सकता है।
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