Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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UPSIDA के औद्योगिक सेक्टरों में प्लॉटों पर किसके संरक्षण में चल रहे वाहन शोरूम?

ग्रेटर नोएडा के साइट-4 और साइट-5 औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक प्लॉटों पर कथित तौर पर रिटेल स्टोर, शोरूम, सर्विस सेंटर और अन्य कमर्शियल गतिविधियां संचालित होने का मामला सामने आया है। कई प्लॉटों को कमर्शियल उपयोग के लिए किराए पर देकर लाखों रुपये महीना कमाने की चर्चा है। सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग से जाम और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। सवाल उठ रहा है कि इन गतिविधियों के लिए UPSIDA से वैध अनुमति या भू-उपयोग परिवर्तन कराया गया है या नहीं। ऐसे में UPSIDA से प्लॉटों के भौतिक निरीक्षण, अनुमति, फायर सेफ्टी, पार्किंग और संभावित राजस्व नुकसान की जांच की मांग उठ रही है।
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औद्योगिक प्लॉटों को कमर्शियल काम के लिए किराए पर देकर वसूला जा रहा लाखों रुपये महीना किराया, सड़क पर पार्किंग से जाम जनता परेशान 

ग्रेटर नोएडा के साइट-4 और साइट-5 औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित किए गए प्लॉटों पर बड़े स्तर पर कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रहे है। कई जगह औद्योगिक प्लॉटों पर रिटेल स्टोर, शोरूम, सर्विस सेंटर, फर्नीचर शोरूम सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। सवाल यह है कि इन गतिविधियों के लिए संबंधित प्लॉटों पर निर्धारित अनुमति या भू-उपयोग परिवर्तन कराया गया है या नहीं?
उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPSIDA) का गठन प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। प्राधिकरण द्वारा उद्यमियों को औद्योगिक गतिविधियों के लिए प्लॉट आवंटित किए जाते हैं और उनके लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में औद्योगिक प्लॉटों का वास्तविक उपयोग नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी जरूरी है।

प्राधिकरण द्वारा अलॉट औद्योगिक प्लॉटों पर खुल रहे शोरूम
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिकॉर्ड में प्लॉट का उपयोग औद्योगिक है और मौके पर कमर्शियल गतिविधि चल रही है तो इसकी जांच कौन करता है?
यदि किसी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधि की अनुमति या भू-उपयोग परिवर्तन कराया गया है तो उसकी जानकारी और संबंधित अनुमति भी स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है तो नियमों के बावजूद गतिविधियां चलने पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सड़क पर पार्किंग से बढ़ रहा जाम का खतरा
कमर्शियल गतिविधियों का असर सिर्फ प्लॉट की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। शोरूम और दुकानों पर आने वाले ग्राहकों की गाड़ियां कई बार सड़क किनारे खड़ी होती हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों पर पार्किंग का दबाव बढ़ता है और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
औद्योगिक क्षेत्र मुख्य रूप से उद्योगों और उनसे जुड़े वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर विकसित किए जाते हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में ग्राहक वाहनों की आवाजाही और पार्किंग बढ़ रही है तो UPSIDA को यह भी देखना चाहिए कि संबंधित गतिविधि से सड़क, पार्किंग और यातायात व्यवस्था पर कितना असर पड़ रहा है।

किसके संरक्षण में हो रही कमर्शियल गतिविधियां?
ग्रेटर नोएडा में तैनात UPSIDA अधिकारियों को इन क्षेत्रों की जमीनी स्थिति की जानकारी होना स्वाभाविक है। किस प्लॉट में क्या गतिविधि चल रहा है, इसकी जानकारी उन्हें होगी ये हम उम्मीद कर सकते हैं। इसके बावजूद यदि लंबे समय से औद्योगिक प्लॉटों पर कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता या फिर नियमों का उल्लंघन सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती? या मामला कुछ और ही हैं। 

सस्ती दरों पर मिले औद्योगिक प्लॉट, अब करोड़ों की कमर्शियल वैल्यू
साइट-4 और साइट-5 में कई औद्योगिक प्लॉट उद्यमियों को उद्योग लगाने के उद्देश्य से अपेक्षाकृत कम दरों पर आवंटित किए गए थे। उद्देश्य था कि इन जमीनों पर उद्योग लगें, रोजगार के अवसर पैदा हों और क्षेत्र का औद्योगिक विकास हो। लेकिन आज इन्हीं औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कमर्शियल गतिविधियों के कारण प्लॉटों की उपयोगिता और किराये की क्षमता भी बढ़ गई है। कई प्लॉटों को कमर्शियल गतिविधियों के लिए किराए पर देकर लाखों रुपये महीना कमाने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि औद्योगिक प्लॉट का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधि के लिए हो रहा है तो क्या प्राधिकरण को निर्धारित कमर्शियल शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क या अन्य देय राशि मिल रही है? यदि बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं तो इससे प्राधिकरण के राजस्व को भी नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

आग की घटना के बाद भी सवाल कायम
कुछ समय पूर्व ग्रेटर नोएडा के साइट-4 क्षेत्र में आग लगने की घटना में तीन लोगों की जान चली गई थी। औद्योगिक क्षेत्र में नियमों के विपरीत गतिविधियों और सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्लॉटों के उपयोग, फायर सेफ्टी, पार्किंग और भवन के वास्तविक इस्तेमाल की जांच और भी जरूरी हो जाती है। केवल प्लॉट आवंटित कर देने के बाद उसकी निगरानी से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं।

UPSIDA के CEO को लेना चाहिए संज्ञान
औद्योगिक प्लॉटों का समय-समय पर भौतिक निरीक्षण होना चाहिए। जिन स्थानों पर नियमों के अनुसार खुला क्षेत्र रखना जरूरी है, वहां उसका पालन हो और औद्योगिक प्लॉटों पर बिना अनुमति चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर कार्रवाई की जाए।
UPSIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को साइट-4 और साइट-5 की जमीनी स्थिति का संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने प्लॉटों पर औद्योगिक गतिविधि के बजाय कमर्शियल काम हो रहा है, कितनों के पास वैध अनुमति है और कितने मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है।

औद्योगिक विकास के नाम पर आवंटित जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है, यह सवाल अब सिर्फ UPSIDA के अधिकारियों से नहीं बल्कि पूरे सिस्टम से जवाब मांग रहा है।
“औद्योगिक प्लॉट पर शोरूम चल रहे हैं, रिकॉर्ड में उद्योगमौके पर क्या है, इसकी जांच कौन करेगा?”